प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ

(Pyar toh Main bhi Karna chahta hun)

प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ
हर एक पल उसके नाम करना चाहता हूँ
बस दिल डरता है उसको कहने से
क्योकि
मेरा और उसका कोई मेल नहीं
वो फूल और मैं काँटा हूँ
काँटा उसके कदमों में नही धरना चाहता हूँ
प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ ।
वह हुस्न की एक वादी है
अपने दिल की ही शहजादी है
वह एक दिलकश नजारा है
जो मुझे जान से भी प्यारा है
उसके दिल में ही रहना चाहता हूँ
प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ
मैं उसके प्यार के काबिल नही
वो हुस्न की कोई लगती राजकुमारी है
मुझमें तो सूरत है ना सीरत है
वह तो सूहे फूलों की क्यारी है
मैं तो पागल हूँ जो उसको अपने दिल में भरना चाहता हूं
पर, प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ
मुझे पता है कि उसके दिल में मेरे लिए कुछ भी नहीं
वो तो बस मेरे लिए थोड़ी हमदर्दी रखती हैं
मैं पागल हूँ जो उसको प्यार समझ बैठा
वो तो बस इंसानियत की कदर करती हैं
ना कुछ कहकर मेरा वो दिल चूर करना नहीं चाहती
‘ प्रीत’ ही ना उसको समझ सका ,बस अब मरना चाहता हूँ
प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ
ऑखे मैं भी नम करना चाहता हूँ
हर एक पल उसके नाम करना चाहता हूँ
प्यार तो मैं भी करना चाहता हूँ
मुझे जिस्म की कोई ख्वाहिश नही
प्यार की कोई आजमाईश नही
मतलब का कोई इकरार नही
दिखावे का कोई रूप किया इखतयार नही

मैं तो बस दिल के अलफाज तेरे संग करना चाहता हूँ
बस प्यार ही तो मैं करना चाहता हूँ

                                         प्रीत रेखी

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